क्लोरैम्फेनिकॉल आई ड्रॉप (Chloramphenicol Eye Drops): यह दवा क्या करती है और किन बातों का ध्यान रखें

इन नामों से भी जानी जाती है: क्लोरैम्फेनिकॉल, chloramphenicol, Chloromycetin, Chlorocol, आंख आने की ड्रॉप, aankh aane ki drop · ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक आई ड्रॉप · अपडेट 2026-08-20 · केवल जानकारी के लिए — चिकित्सा सलाह नहीं

चित्र में — आंख का सफेद हिस्सा, जिसकी सतही रक्त वाहिकाएं उभरकर दिख रही हैं

आसान भाषा में: यह एंटीबायोटिक ड्रॉप जिन बैक्टीरिया पर असर करती है, उन्हें वे प्रोटीन बनाने से रोक देती है जिनकी उन्हें जीने और बढ़ने के लिए ज़रूरत होती है, जिससे आंख की अपनी बचाव-प्रणाली इन्फेक्शन को साफ कर पाती है। सीधे आंख में डालने से यह इन्फेक्शन वाली जगह पर ही अच्छी-खासी मात्रा में पहुंचती है, जबकि सही तरीके से इस्तेमाल की गई ड्रॉप से खून में बहुत ही कम दवा जाती है।

किन चीज़ों के लिए दी जाती है

  • बैक्टीरिया से होने वाला कंजंक्टिवाइटिस (pink eye), यानी आंख आना
  • आंख की ऊपरी सतह के दूसरे बैक्टीरियल इन्फेक्शन

आम साइड इफेक्ट

  • डालते समय थोड़ी देर के लिए चुभन या जलन
  • आंख का लाल होना
  • इस्तेमाल के तुरंत बाद कुछ देर धुंधला दिखना
  • खुजली या हल्की जलन-सी
  • आंखों से पानी आना

गंभीर साइड इफेक्ट — इनमें तुरंत डॉक्टर से मिलें

एलर्जी रिएक्शन, जिसमें पलक में सूजन, काफी लाली, या जलन का बढ़ जाना हो

खून की कोशिकाएं बनाने वाली बोन मैरो का दब जाना, जिसे पुराने समय से इस एंटीबायोटिक के साथ जोड़ा जाता रहा है, हालांकि आई ड्रॉप वाले रूप से यह बेहद दुर्लभ है और इसका नाता कहीं ज़्यादा मज़बूती से खाने या इंजेक्शन वाले रूपों से रहा है

इलाज के बावजूद आंख में नए इन्फेक्शन के या इन्फेक्शन के बढ़ने के संकेत, जिन पर दोबारा जांच की ज़रूरत होती है

गंभीर एलर्जी रिएक्शन, जिसमें चेहरे पर सूजन या सांस लेने में दिक्कत हो (दुर्लभ)

यह दवा कौन-से लैब मान बदल सकती है

यह बात ज़्यादातर गाइड नहीं बतातीं: दवाएं ब्लड रिपोर्ट में दिखती हैं। अगर आप क्लोरैम्फेनिकॉल आई ड्रॉप (Chloramphenicol Eye Drops) ले रहे हैं और नीचे दिया कोई मान रिपोर्ट में अजीब लग रहा है, तो उसकी एक वजह यह दवा भी हो सकती है — लेकिन डॉक्टर से पूछे बिना कोई दवा कभी बंद न करें।

सफेद रक्त कोशिकाओं के बनने पर असर डालने वाला बोन मैरो का दबना इस वर्ग के एंटीबायोटिक के साथ जानी-पहचानी लेकिन दुर्लभ चिंता है, और पुराने समय से इसका नाता सही तरीके से इस्तेमाल की गई आई ड्रॉप के मुकाबले खाने या इंजेक्शन वाले रूपों से कहीं ज़्यादा रहा है।

WBC / टोटल ल्यूकोसाइट काउंट

इस वर्ग के एंटीबायोटिक के साथ प्लेटलेट काउंट घटने की रिपोर्टें बहुत ही कम मिली हैं; यहां भी इसका नाता ऊपर से डाली जाने वाली आई ड्रॉप के बजाय पूरे शरीर में जाने वाले (खाने या इंजेक्शन वाले) रूपों से कहीं ज़्यादा है।

प्लेटलेट काउंट (Platelets)

ध्यान रखने लायक बातें

  • आंख दो-तीन दिन में ठीक दिखने लगे तब भी बताया गया पूरा कोर्स खत्म करें, ताकि इन्फेक्शन के लौटने की आशंका कम रहे
  • आई ड्रॉप एक-दूसरे के साथ साझा न करें, और एक आंख के लिए इस्तेमाल की गई ड्रॉप स्वस्थ आंख में न डालें, ताकि इन्फेक्शन न फैले
  • इलाज के दौरान कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से बचें, जब तक डॉक्टर कुछ और न कहे
  • अगर नज़र में बदलाव आए, दर्द बढ़े, या कुछ दिनों में सुधार न दिखे तो जल्दी डॉक्टर को दिखाएं
  • बोतल खुल जाने के बाद बताई गई अवधि बीतने पर उसे फेंक दें, क्योंकि समय के साथ उसके दूषित होने का खतरा बढ़ता जाता है

लोग अक्सर पूछते हैं

मैंने पढ़ा है कि यह एंटीबायोटिक खून की कोशिकाओं पर असर डाल सकता है, क्या आई ड्रॉप को लेकर चिंता करनी चाहिए?

इस एंटीबायोटिक से जुड़े खून की कोशिकाओं पर होने वाले गंभीर असर, जैसे खून की कोशिकाओं का बनना घट जाना, लगभग पूरी तरह उन खाने या इंजेक्शन वाले रूपों से जुड़े हैं जो पूरे शरीर में जाते हैं, न कि सही तरीके से इस्तेमाल की गई आई ड्रॉप से, जिससे खून में बहुत ही कम दवा पहुंचती है। यह एक पुरानी सावधानी है जिसके बारे में जानना ठीक है, लेकिन आम तौर पर कुछ दिनों के आई ड्रॉप के कोर्स में इसे कोई मायने रखने वाला खतरा नहीं माना जाता।

मेरी आंख तो ठीक लग रही है, क्या फिर भी ड्रॉप का पूरा कोर्स करना ज़रूरी है?

हां। इन्फेक्शन करने वाले सारे बैक्टीरिया साफ होने से पहले ही अक्सर लक्षण ठीक होने लगते हैं। जल्दी बंद कर देने से इन्फेक्शन लौट सकता है, और कभी-कभी ऐसे रूप में जिसका इलाज ज़्यादा मुश्किल होता है। बताए गए तरीके से पूरा कोर्स करने पर इन्फेक्शन के पूरी तरह साफ होने की सबसे अच्छी संभावना रहती है और दोबारा होने की आशंका घटती है।

यह जानकारी पढ़ने-समझने के लिए है और डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती। कोई भी दवा शुरू करने, बंद करने या उसकी मात्रा बदलने का फैसला उसी डॉक्टर का है जिसने वह दवा लिखी है।

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