लैटानोप्रोस्ट आई ड्रॉप (Latanoprost Eye Drops): यह दवा क्या करती है और किन बातों का ध्यान रखें

इन नामों से भी जानी जाती है: लैटानोप्रोस्ट, latanoprost, Xalatan, ज़ालाटन, Latoprost, Lacoma · प्रोस्टाग्लैंडिन एनालॉग आई ड्रॉप · अपडेट 2026-08-20 · केवल जानकारी के लिए — चिकित्सा सलाह नहीं

चित्र में — आंख, जहां ग्लूकोमा में तरल का दबाव बढ़ता है

आसान भाषा में: यह आई ड्रॉप आंख के भीतर घूमते रहने वाले तरल (एक्वस ह्यूमर) के बाहर निकलने की रफ्तार बढ़ा देती है, जिससे आंख के भीतर का वह दबाव कम होता है जो लंबे समय तक ज़्यादा बना रहे तो ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकता है और नज़र के लिए खतरा बन सकता है। इसे डॉक्टर के तय किए हुए नियमित समय पर डाला जाता है, और लगातार इस्तेमाल इसलिए मायने रखता है क्योंकि ग्लूकोमा में दबाव से होने वाला नुकसान शुरुआत में बिना किसी लक्षण के, चुपचाप बढ़ता है।

किन चीज़ों के लिए दी जाती है

  • आंख के भीतर बढ़ा हुआ दबाव
  • ओपन-एंगल ग्लूकोमा (open-angle glaucoma)
  • ओक्युलर हाइपरटेंशन (आंख का दबाव ज़्यादा रहना)

आम साइड इफेक्ट

  • आंख का लाल होना
  • ड्रॉप डालने के तुरंत बाद चुभन या जलन
  • थोड़ी देर के लिए धुंधला दिखना
  • खुजली
  • पलकों के बालों का धीरे-धीरे लंबा, घना या गहरा होते जाना

गंभीर साइड इफेक्ट — इनमें तुरंत डॉक्टर से मिलें

आइरिस (आंख का रंगीन हिस्सा) का स्थायी रूप से गहरा पड़ जाना, जो भूरे और किसी दूसरे रंग की मिली-जुली आंखों में सबसे ज़्यादा दिखता है, और अगर सिर्फ एक आंख में दवा डाली जा रही हो तो यह असमान भी लग सकता है

पलक के आसपास की त्वचा का गहरा पड़ जाना

मैक्युला (रेटिना का बीच का हिस्सा) में सूजन, उन लोगों में जिनकी आंख की कुछ खास सर्जरी पहले हो चुकी है या जिन्हें आंख की कोई पुरानी बीमारी है

आंख की पहले से मौजूद सूजन (यूवाइटिस) का बढ़ जाना

आंख में इन्फेक्शन, अगर ड्रॉपर की नोक आंख या किसी और सतह से छू जाए

यह दवा कौन-से लैब मान बदल सकती है

यह बात ज़्यादातर गाइड नहीं बतातीं: दवाएं ब्लड रिपोर्ट में दिखती हैं। अगर आप लैटानोप्रोस्ट आई ड्रॉप (Latanoprost Eye Drops) ले रहे हैं और नीचे दिया कोई मान रिपोर्ट में अजीब लग रहा है, तो उसकी एक वजह यह दवा भी हो सकती है — लेकिन डॉक्टर से पूछे बिना कोई दवा कभी बंद न करें।

इस आई ड्रॉप पर नज़र रखने के लिए आमतौर पर खून की नियमित जांच की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि सही तरीके से डाली गई ड्रॉप का बहुत थोड़ा हिस्सा ही खून में पहुंचता है।

क्रिएटिनिन (Creatinine)

ध्यान रखने लायक बातें

  • यह ड्रॉप शुरू करने से पहले आंख के डॉक्टर को आंख की सूजन, आंख की पहले हुई किसी सर्जरी, या रेटिना की किसी दिक्कत के बारे में ज़रूर बताएं
  • हर ड्रॉप डालने के बाद करीब एक मिनट तक आंख के भीतरी कोने पर हल्का दबाव रखने (नैसोलैक्रिमल ऑक्लूजन) से खून में सोखी जाने वाली दवा की मात्रा घटती है और पूरे शरीर पर होने वाले साइड इफेक्ट कम होते हैं
  • ध्यान रखें कि आंख के रंग में जो बदलाव एक बार हो जाए, वह आमतौर पर बाद में ड्रॉप बंद कर देने पर भी स्थायी रहता है
  • ड्रॉपर की नोक को आंख या पलक से छूने न दें, ताकि उसके दूषित होने का खतरा कम रहे
  • अगर एक से ज़्यादा तरह की आई ड्रॉप इस्तेमाल हो रही हों, तो उन्हें बताए गए अंतर पर डालें, क्योंकि क्रम और समय दवा के सोखे जाने पर असर डालते हैं

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या यह आई ड्रॉप मेरी आंखों का रंग हमेशा के लिए बदल देगी?

ऐसा हो सकता है। कुछ लोगों को, खासकर जिनकी आंखें हेज़ल रंग की हों या भूरे के साथ हरे या नीले रंग की मिली-जुली हों, लंबे इस्तेमाल पर आइरिस का रंग धीरे-धीरे गहरा होता दिखता है, जिसकी वजह आइरिस में पिगमेंट का ज़्यादा बनना है। यह बदलाव ड्रॉप बंद कर देने के बाद भी आमतौर पर स्थायी रहता है, हालांकि इससे नज़र या आंख की सेहत पर असर नहीं पड़ता; और इसे सिर्फ एक आंख में डालने पर दोनों आंखों का रंग थोड़ा अलग-अलग रह सकता है।

नैसोलैक्रिमल ऑक्लूजन क्या है और मैं इसे क्यों करूं?

इसका मतलब है ड्रॉप डालने के बाद करीब एक मिनट तक नाक के पास वाले, आंख के भीतरी कोने पर उंगली से हल्का दबाव बनाए रखना। इससे दवा का आंसू की नली और फिर खून में बह जाना धीमा पड़ता है, जिससे दवा का ज़्यादा हिस्सा आंख पर ही काम करता रहता है और शरीर के बाकी हिस्सों तक कम पहुंचता है, और पूरे शरीर पर साइड इफेक्ट होने की आशंका घटती है।

यह जानकारी पढ़ने-समझने के लिए है और डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकती। कोई भी दवा शुरू करने, बंद करने या उसकी मात्रा बदलने का फैसला उसी डॉक्टर का है जिसने वह दवा लिखी है।

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