संक्षेप में
चिकनपॉक्स में खुजली वाले छालों का एक पहचाना हुआ दौर चलता है, जिसे ज़्यादातर घर पर संभाला जा सकता है, लेकिन एक नियम में कोई ढील नहीं: चिकनपॉक्स या किसी भी वायरल बीमारी वाले बच्चे को कभी एस्पिरिन (aspirin) न दें, क्योंकि इससे रे सिंड्रोम (Reye syndrome) का खतरा होता है।
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रैश (rash) असल में कैसे बढ़ता है
चिकनपॉक्स का रैश छोटे लाल दानों से शुरू होता है, फिर पानी से भरे छालों में बदलता है, और करीब चार से सात दिनों में आखिर में पपड़ी बनकर सूख जाता है। नए दाने अक्सर लहरों में निकलते रहते हैं, इसलिए एक ही समय पर बच्चे के शरीर पर दाने, छाले और पपड़ी — तीनों मौजूद हो सकते हैं।
रैश के साथ आमतौर पर हल्का बुखार और सुस्ती भी रहती है, खासकर पहले एक-दो दिनों में। बच्चे को आमतौर पर रैश निकलने से करीब एक-दो दिन पहले से लेकर जब तक सभी छाले पपड़ी में न बदल जाएं, तब तक संक्रामक (contagious) माना जाता है।
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खुजली से राहत
ठंडे पानी से नहलाना, कभी-कभी उसमें सादा, बिना खुशबू वाला ओटमील (oatmeal) मिलाकर, और कैलामाइन (calamine) जैसे लोशन — ये बिना दवा के खुजली कम करने में मदद करते हैं। बच्चे के नाखून छोटे रखने से खुजलाने से होने वाला त्वचा को नुकसान और इन्फेक्शन का खतरा कम होता है।
ढीले, हवादार कपड़े जलन भरी त्वचा के लिए तंग या खुरदुरे कपड़ों से ज़्यादा आरामदायक होते हैं। अगर नहलाना और लोशन काफी न हो, तो पीडियाट्रिशियन बच्चे की उम्र के हिसाब से खुजली में राहत देने वाले विकल्प सुझा सकते हैं।
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वायरल बीमारी वाले बच्चे को कभी एस्पिरिन न दें
एस्पिरिन, या इसे मिलाकर बना कोई भी प्रोडक्ट, चिकनपॉक्स या किसी भी वायरल बीमारी वाले बच्चे या किशोर (teenager) को कभी नहीं देना चाहिए। इसका जुड़ाव रे सिंड्रोम से है, जो एक दुर्लभ लेकिन गंभीर और जानलेवा हो सकने वाली स्थिति है, जो लिवर और दिमाग़ को प्रभावित करती है।
बुखार या दर्द से राहत के अन्य विकल्प मौजूद हैं, लेकिन किसी खास बच्चे के लिए कौन सी दवा और कितनी मात्रा में इस्तेमाल करनी है — यह बात पीडियाट्रिशियन या फार्मासिस्ट से तय करनी चाहिए, न कि दवा की अलमारी में जो मिला उसी से अंदाज़ा लगाकर।
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वैक्सीन मौजूद है
वेरिसेला (varicella) वैक्सीन कई देशों में बच्चों के नियमित टीकाकरण (immunization) शेड्यूल का हिस्सा है, और जहां इसका व्यापक इस्तेमाल होता है, वहां इसने चिकनपॉक्स के मामलों की संख्या और गंभीर जटिलताओं (complications) की दर, दोनों को काफी कम किया है।
जिन बच्चों को वैक्सीन लगी है और फिर भी चिकनपॉक्स हो जाता है, उनमें आमतौर पर बीमारी काफी हल्की होती है — बिना वैक्सीन वाले मामलों की तुलना में कम छाले और कम या न के बराबर बुखार।
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जब जटिलताओं में देखभाल ज़रूरी हो
बहुत तेज़ या बार-बार लौटने वाला बुखार, किसी छाले के आसपास लालिमा, गर्माहट या सूजन जो बैक्टीरियल स्किन इन्फेक्शन का संकेत हो, सांस लेने में दिक्कत, असामान्य नींद-सुस्ती, गर्दन का अकड़ जाना, या लगातार उल्टी — ये एक सामान्य मामले से आगे की बात है, और इनके लिए बिना देर किए तुरंत पीडियाट्रिशियन या इमरजेंसी जांच ज़रूरी है।
घर से जुड़ी एक बात जिसे आसानी से नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है: अगर घर में कोई गर्भवती महिला जिसे इम्यूनिटी (immunity) नहीं है, कोई नवजात शिशु, या कमज़ोर इम्यून सिस्टम वाला व्यक्ति चिकनपॉक्स के संपर्क में आया है, तो तुरंत उनके डॉक्टर से संपर्क करें — संपर्क में आने के बाद समय-सीमित सुरक्षात्मक विकल्प मौजूद होते हैं।
स्रोत
- Chickenpox (Varicella)cdc.gov
- Chickenpox Vaccinationcdc.gov
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