संक्षेप में
ग्लूकोमा सालों तक बिना किसी लक्षण के ऑप्टिक नर्व को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकता है — इसीलिए आंख का प्रेशर नियमित रूप से चेक कराना जरूरी है। समय पर पकड़ में आ जाए तो रोज़ आंखों में डालने वाली ड्रॉप्स और बाकी इलाज बची हुई ज्यादातर रोशनी बचा सकते हैं।
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इसे 'खामोश चोर' क्यों कहा जाता है
ग्लूकोमा (glaucoma) कई बीमारियों का एक समूह है जो धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है — यह वह तार है जो आंख से विजुअल सिग्नल दिमाग तक ले जाता है। नुकसान आमतौर पर नज़र के किनारों से शुरू होता है, जिसे पकड़ पाना मुश्किल होता है क्योंकि बीमारी काफी बढ़ने तक बीच वाली नज़र (central vision) अक्सर साफ बनी रहती है।
जब तक किसी को खुद बदलाव महसूस होता है, तब तक आमतौर पर कुछ नज़र पहले ही जा चुकी होती है, और वह हिस्सा आमतौर पर वापस नहीं आता। लेकिन जो नज़र बची है, उसे समय पर इलाज से बचाया जा सकता है — और इसे जल्दी पकड़ने का पूरा मकसद यही है।
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आंख का प्रेशर, और स्क्रीनिंग किसे करानी चाहिए
ज्यादातर मामलों में आंख के अंदर बढ़ा हुआ प्रेशर ही नुकसान की मुख्य वजह है, हालांकि हर व्यक्ति की ऑप्टिक नर्व कितना प्रेशर सह सकती है यह अलग-अलग होता है — इसीलिए कुछ लोगों को नॉर्मल प्रेशर पर भी ग्लूकोमा हो जाता है, जबकि कुछ को हाई प्रेशर पर भी नहीं होता।
आमतौर पर 40 साल की उम्र से वयस्कों को पूरी आंखों की जांच (comprehensive eye exam) कराने की सलाह दी जाती है, और डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, परिवार में ग्लूकोमा की हिस्ट्री या कुछ ज्यादा जोखिम वाले बैकग्राउंड वाले लोगों को यह जांच ज्यादा बार करानी चाहिए।
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डॉक्टर इसकी जांच कैसे करते हैं
पूरी आंखों की जांच में आंख के अंदर का प्रेशर मापा जाता है, ऑप्टिक नर्व को सीधे देखकर नुकसान के शुरुआती संकेत जांचे जाते हैं, और विज़ुअल फील्ड टेस्ट से साइड की नज़र (peripheral vision) का नुकसान इससे पहले ही पकड़ा जा सकता है कि व्यक्ति को खुद इसका पता चले।
चूंकि ग्लूकोमा के शुरुआती लक्षण नहीं होते, इसलिए इस तरह की नियमित स्क्रीनिंग — तकलीफ दिखने का इंतज़ार किए बिना — ही असल में इसे समय पर पकड़कर नज़र बचाती है।
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इलाज के विकल्प
आंख का प्रेशर कम करने वाली प्रिस्क्रिप्शन आई ड्रॉप्स सबसे आम पहला इलाज हैं, और रोज़ नियमित रूप से लगाए जाने पर कई लोगों के लिए अच्छा काम करती हैं।
जब सिर्फ ड्रॉप्स काफी नहीं होतीं, तो डॉक्टरों के पास और विकल्प होते हैं: मुंह से ली जाने वाली दवाएं, लेज़र ट्रीटमेंट जो आंख से फ्लुइड निकलने में मदद करता है, और सर्जरी जिसमें ड्रेनेज के नए रास्ते बनाए जाते हैं — यह चुनाव बीमारी कितनी बढ़ रही है, इस पर निर्भर करता है।
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ड्रॉप्स नियमित लगाना और इसके साथ जीना
चूंकि ग्लूकोमा शुरुआत में कोई लक्षण नहीं देता, इसलिए ड्रॉप्स लगाना छूटना आसान होता है क्योंकि रोज़ाना कोई फर्क महसूस नहीं होता। लेकिन रोज़ नियमित रूप से ड्रॉप्स लगाना ही सालों तक आंख के प्रेशर से ऑप्टिक नर्व को बचाता है।
जो नुकसान पहले ही हो चुका है, उसे वापस नहीं किया जा सकता, लेकिन लगातार इलाज और आई डॉक्टर (ophthalmologist) से नियमित निगरानी के साथ, ग्लूकोमा वाले ज्यादातर लोग जिंदगी भर काम-लायक नज़र बनाए रखते हैं।
स्रोत
- Glaucomamedlineplus.gov
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