पित्ती (Hives): आमतौर पर इसका क्या मतलब होता है
इन नामों से भी खोजा जाता है: पित्ती, pitti, शीतपित्त, खुजली वाले चकत्ते, skin par chakatte, urticaria · अपडेट 13 सितंबर 2026 · केवल जानकारी के लिए — चिकित्सा सलाह नहीं
संक्षेप में: पित्ती (hives) त्वचा पर अचानक उभर आने वाले खुजली भरे, उठे हुए लाल या त्वचा के रंग के चकत्ते होते हैं, जो अक्सर किसी खाने, दवा या कीड़े के डंक से हुई एलर्जी की प्रतिक्रिया से शुरू होते हैं, हालांकि इन्फेक्शन, गर्मी, तनाव और अनजान वजहें भी आम हैं। ज़्यादातर बार ये एंटीहिस्टामिन दवाओं और ट्रिगर से बचने के साथ कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। जो पित्ती छह हफ्ते से ज़्यादा बार-बार लौटती रहे उसे क्रॉनिक पित्ती कहते हैं और उसकी डॉक्टरी जांच ज़रूरी है, जबकि होंठ, जीभ या गले में सूजन या सांस लेने में तकलीफ के साथ निकली पित्ती के लिए तुरंत इमरजेंसी इलाज चाहिए।
इन हालात में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
पित्ती के साथ होंठ, जीभ, गले या चेहरे पर सूजन एनाफिलैक्सिस (anaphylaxis) का संकेत है — तुरंत इमरजेंसी में जाएं।
पित्ती के साथ सांस लेने में दिक्कत, सांस में सीटी की आवाज़, या गला कसने जैसा एहसास हो तो तुरंत इमरजेंसी सेवाओं को कॉल करें।
जो पित्ती छह हफ्ते से ज़्यादा टिके या बार-बार लौटती रहे, उसकी जांच करानी चाहिए ताकि ट्रिगर पहचाने जा सकें और अंदरूनी वजहें खारिज हो सकें।
पित्ती के साथ बुखार, जोड़ों में दर्द, या आम चकत्तों की जगह नील पड़ना हो तो जल्दी डॉक्टरी जांच चाहिए।
आम कारण
- एलर्जी की प्रतिक्रिया — मेवे, शेलफिश या अंडे जैसे खाने, एंटीबायोटिक या NSAID जैसी दवाएं, और कीड़ों के डंक आमतौर पर हिस्टामिन के निकलने की वह प्रक्रिया शुरू कर देते हैं जिससे पित्ती निकलती है।
- वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन — सर्दी-ज़ुकाम और दूसरे इन्फेक्शन कुछ समय के लिए पित्ती निकाल सकते हैं, खासकर बच्चों में, क्योंकि इम्यून सिस्टम बीमारी के जवाब में सक्रिय हो जाता है।
- गर्मी, ठंड या दबाव — कुछ लोगों को धूप में रहने, ठंडे तापमान, कसे कपड़ों या खुजलाने से पित्ती निकल आती है, जिसे फिजिकल अर्टिकेरिया (physical urticaria) कहते हैं।
- मानसिक तनाव — जिन लोगों को पित्ती निकलने की प्रवृत्ति होती है, उनमें तनाव के हार्मोन बिना किसी खास एलर्जन के भी पित्ती बढ़ा या शुरू कर सकते हैं।
- अनजान या ऑटोइम्यून वजहें — जब पित्ती छह हफ्ते से ज़्यादा बनी रहे और कोई ट्रिगर पहचान में न आए, तो इसके पीछे अक्सर कोई ऑटोइम्यून प्रक्रिया होती है।
क्या राहत देता है
- खुजली और सूजन कम करने के लिए बिना पर्ची वाली, नींद न लाने वाली एंटीहिस्टामिन दवा बताए गए तरीके से लें।
- खुजली वाली त्वचा को आराम देने के लिए ठंडी पट्टी रखें या ठंडे पानी से नहाएं।
- पहचाने हुए ट्रिगर से बचें, जैसे कुछ खास खाने, कसे कपड़े, या बहुत ज़्यादा गर्मी।
- ढीले, हवादार कपड़े पहनें और खुजलाने से बचें, जिससे जलन और बढ़ सकती है।
किस डॉक्टर को दिखाएं
डर्मेटोलॉजिस्ट बार-बार लौटने वाली पित्ती के ट्रिगर पहचान सकते हैं और लंबे समय का इलाज बता सकते हैं; अगर सूजन से सांस लेने पर असर पड़ रहा हो तो रूटीन अपॉइंटमेंट लेने के बजाय तुरंत इमरजेंसी सेवाओं को कॉल करें। बार-बार लौटने वाली पित्ती, या ऐसा कोई भी दौरा जिसमें किसी खाने, दवा या डंक के ट्रिगर का शक हो, एलर्जिस्ट का क्षेत्र है।
डॉक्टर अक्सर कौन-सी जांच कराते हैं
अगर यह लक्षण बना रहे, तो डॉक्टर आमतौर पर ये मान देखते हैं। हर मान का अपना गाइड है — नॉर्मल रेंज और उसे बदलने वाली चीज़ें।
लोग अक्सर पूछते हैं
पित्ती अचानक क्यों निकल आती है?
पित्ती आमतौर पर तब निकलती है जब इम्यून सिस्टम किसी ट्रिगर — जैसे कोई खाना, दवा, कीड़े का डंक, इन्फेक्शन, गर्मी या तनाव — के जवाब में हिस्टामिन छोड़ता है। इससे छोटी खून की नसों से तरल त्वचा में रिसने लगता है और खुजली भरे, उभरे हुए चकत्ते बन जाते हैं, जो कुछ ही मिनटों में शरीर पर कहीं भी उभर सकते हैं।
पित्ती आमतौर पर कितने समय रहती है?
ट्रिगर हट जाने और एंटीहिस्टामिन लेने पर ज़्यादातर एक्यूट पित्ती कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। अगर चकत्ते छह हफ्ते से ज़्यादा समय तक उभरते और मिटते रहें, तो इसे क्रॉनिक पित्ती माना जाता है और इसमें वजहें पहचानने के लिए आमतौर पर जांच की ज़रूरत होती है।
क्या पित्ती छूत की बीमारी है?
पित्ती खुद छूत की बीमारी नहीं है, लेकिन जिस वायरल इन्फेक्शन से यह शुरू हुई हो, जैसे सर्दी-ज़ुकाम, वह फैल सकता है। ये चकत्ते त्वचा में हिस्टामिन की प्रतिक्रिया से बनते हैं और छूने से एक व्यक्ति से दूसरे तक नहीं फैल सकते।
मिलते-जुलते लक्षण
यह गाइड जानकारी के लिए है और डॉक्टर की जांच की जगह नहीं ले सकती। अगर कोई लक्षण गंभीर हो, तेज़ी से बढ़ रहा हो, या आपको चिंता हो रही हो, तो डॉक्टर को दिखाएं — जांच करा लेना और तसल्ली पा लेना कभी बेकार नहीं जाता।