रात में पसीना आना (Night Sweats): आमतौर पर इसका क्या मतलब होता है
इन नामों से भी खोजा जाता है: raat me pasina, रात में पसीना आना, so kar pasine me bhigna, नींद में पसीना आना · अपडेट 13 सितंबर 2026 · केवल जानकारी के लिए — चिकित्सा सलाह नहीं
संक्षेप में: रात में पसीना आना — यानी इतना पसीना आना कि नींद से जागने पर कपड़े या बिस्तर भीग जाएं — अक्सर कमरे के गर्म होने, भारी बिस्तर, या किसी गुज़रती वायरल बीमारी से होता है, और आम तौर पर अपने आप ठीक हो जाता है। रात का पसीना अगर बार-बार आए, इतना हो कि सब भीग जाए, और इसके साथ बुखार, बिना वजह वज़न घटना, या लगातार थकान हो, तो डॉक्टरी जांच ज़रूरी है, क्योंकि इसका संबंध कभी-कभी किसी इन्फेक्शन, हार्मोन के बदलाव, या सूजन वाली स्थिति से हो सकता है।
इन हालात में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
कई हफ़्तों तक बार-बार इतना पसीना आए कि सब भीग जाए, तो जांच कराएं।
रात के पसीने के साथ बिना वजह वज़न घटे या लगातार बुखार रहे, तो बिना देर किए डॉक्टर से जांच कराएं।
रात के पसीने के साथ गिल्टियों (लिम्फ नोड) में सूजन हो, तो डॉक्टरी मदद लें।
रात के पसीने के साथ लगातार थकान रहे या कुल मिलाकर तबीयत ठीक न लगे, तो जांच कराएं।
आम कारण
- कमरे का बहुत गर्म होना — गर्म कमरा या भारी बिस्तर सबसे आम और सबसे सीधी वजहों में से एक है।
- वायरल या दूसरे हल्के इन्फेक्शन — बुखार के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से पसीना आ सकता है, जो रात में ज़्यादा रहता है।
- मेनोपॉज़ से जुड़े हार्मोन के बदलाव — हार्मोन के उतार-चढ़ाव से आम तौर पर गर्मी के झोंके और रात का पसीना शुरू होता है।
- घबराहट या तनाव — तनाव का स्तर बढ़ने पर पसीना बढ़ सकता है, नींद के दौरान भी।
- कुछ दवाएं — कुछ दवाओं में रात का पसीना एक ज्ञात साइड इफेक्ट है।
- थायरॉइड या सूजन वाली अंदरूनी स्थितियां — थायरॉइड की सक्रियता में लगातार बदलाव या सूजन शरीर के तापमान के नियंत्रण पर असर डाल सकती है।
क्या राहत देता है
- कमरे को ठंडा रखें और हवादार बिस्तर इस्तेमाल करें।
- हल्के और पसीना सोखने वाले कपड़े पहनकर सोएं।
- सोने से ठीक पहले शराब, कैफ़ीन और मसालेदार खाने से बचें।
- कितनी बार होता है और साथ में क्या लक्षण दिखते हैं, इसका रिकॉर्ड रखें।
किस डॉक्टर को दिखाएं
शुरुआत अपने फैमिली डॉक्टर से करें; बार-बार भिगो देने वाला रात का पसीना बुखार या वज़न घटने के साथ हो, तो आगे जांच ज़रूरी है, कभी-कभी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के साथ।
डॉक्टर अक्सर कौन-सी जांच कराते हैं
अगर यह लक्षण बना रहे, तो डॉक्टर आमतौर पर ये मान देखते हैं। हर मान का अपना गाइड है — नॉर्मल रेंज और उसे बदलने वाली चीज़ें।
लोग अक्सर पूछते हैं
क्या रात का पसीना नींद में आने वाले आम पसीने से अलग होता है?
हां, गर्म कमरे की वजह से रात में हल्का पसीना आना सामान्य है, लेकिन असली नाइट स्वेट्स इतने तेज़ होते हैं कि सोने के कपड़े या चादर भीग जाएं, और अक्सर बार-बार होते हैं। यही ज़्यादा भिगो देने वाला, बार-बार लौटने वाला पैटर्न है जिसमें कमरे में मामूली बदलाव के बजाय आम तौर पर डॉक्टरी ध्यान चाहिए।
क्या मेनोपॉज़ से रात में पसीना आ सकता है?
हां, पेरीमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोन के बदलाव आम तौर पर गर्मी के झोंके और रात का पसीना पैदा करते हैं, क्योंकि एस्ट्रोजन में बदलाव शरीर के तापमान के नियंत्रण पर असर डालता है। ये आम हैं और अक्सर संभाले जा सकते हैं, फिर भी लगातार बने रहने वाले या गंभीर मामलों पर डॉक्टर से बात करना ज़रूरी है।
मिलते-जुलते लक्षण
यह गाइड जानकारी के लिए है और डॉक्टर की जांच की जगह नहीं ले सकती। अगर कोई लक्षण गंभीर हो, तेज़ी से बढ़ रहा हो, या आपको चिंता हो रही हो, तो डॉक्टर को दिखाएं — जांच करा लेना और तसल्ली पा लेना कभी बेकार नहीं जाता।