संक्षेप में
सर्दी-जुकाम या बुखार के बाद 3 से 8 हफ्ते तक खांसी बनी रहना आम है और आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होता। यहां जानिए कि वायरल इन्फेक्शन के बाद की खांसी (post-viral cough) क्या है, और किन वजहों से खांसी चलती रह सकती है, 2 हफ्ते से ज्यादा की खांसी की टीबी जांच क्यों होनी चाहिए, और वे संकेत जिनमें आज ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
इमरजेंसी अगर: तुरंत इमरजेंसी में जाएं, अगर आप कुछ धारियों से ज्यादा खून की खांसी कर रहे हैं, सांस लेने के लिए जूझ रहे हैं, आपके होंठ या त्वचा नीली, स्लेटी या बहुत फीकी दिख रही है, आपको अचानक भ्रम (कन्फ्यूज़न) की स्थिति हो, खून की खांसी या सांस फूलने के साथ सीने में दर्द हो, अचानक सीने में निचोड़ने या दबाव जैसा दर्द हो जो बांह, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैले या पसीने या मितली के साथ आए, या चेहरे या गले में सूजन हो, साथ में पित्ती या निगलने में दिक्कत हो।
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WBC / टोटल ल्यूकोसाइट काउंट, सीआरपी (CRP), ईएसआर (ESR)
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क्या सर्दी-जुकाम के बाद 3 हफ्ते से ज्यादा खांसी रहना सामान्य है?
हां, यह आम है। NHS के अनुसार खांसी आमतौर पर 3 से 4 हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाती है, और MedlinePlus के अनुसार एक्यूट खांसी, जो आमतौर पर सर्दी-जुकाम, फ्लू या साइनस इन्फेक्शन के बाद होती है, आमतौर पर 3 हफ्ते बाद चली जाती है। डॉक्टर 3 से 8 हफ्ते चलने वाली खांसी को सबएक्यूट खांसी (subacute cough) और 8 हफ्ते से ज्यादा चलने वाली खांसी को क्रॉनिक खांसी (chronic cough) कहते हैं।
इसलिए बुखार या सर्दी-जुकाम के बाद 3 या 4 हफ्ते पर भी खांसी का बने रहना अपने आप में इस बात का संकेत नहीं है कि कुछ गड़बड़ है, बशर्ते वह धीरे-धीरे कम हो रही हो और नीचे बताए गए चेतावनी संकेतों में से कोई न हो।
दो सीमाएं मायने रखती हैं। जो खांसी 2 हफ्ते से ज्यादा चली हो, उसकी राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत टीबी जांच होनी चाहिए, और जो खांसी 8 हफ्ते में भी नहीं गई हो, उसमें और इंतज़ार करने के बजाय पूरी जांच होनी चाहिए।
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इन्फेक्शन के बाद की (पोस्ट-वायरल) खांसी क्या है?
इन्फेक्शन के बाद की खांसी (post-infectious cough), जिसे अक्सर पोस्ट-वायरल खांसी कहते हैं, सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे सांस के इन्फेक्शन के बाद 3 से 8 हफ्ते तक चलने वाली खांसी है। कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल की 2024 की एक समरी बताती है कि इन्फेक्शन से सूजन शुरू होती है, जिससे सांस की नलियां ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं और ज्यादा बलगम बनता है, जबकि बलगम बाहर निकलना कम हो जाता है। इन्फेक्शन खत्म हो जाने के बाद भी सांस की नलियां प्रतिक्रिया करती रहती हैं।
यह एक्सक्लूज़न से किया जाने वाला डायग्नोसिस (diagnosis of exclusion) है। डॉक्टर खांसी को इन्फेक्शन के बाद की तभी कहते हैं जब उससे पहले इन्फेक्शन हुआ हो, सीने की जांच तसल्ली देने वाली हो, और इतनी लंबी खांसी के दूसरे कारणों, जैसे अस्थमा, COPD, एसिड रिफ्लक्स या ब्लड प्रेशर की ACE इनहिबिटर दवा, पर विचार करके उन्हें खारिज कर दिया गया हो।
कोई दवा मददगार साबित नहीं हुई है। इन्फेक्शन के बाद की खांसी में इन्हेल किए जाने वाले स्टेरॉयड, ब्रोंकोडायलेटर और गोलियों की सिस्टमैटिक समीक्षाओं में फायदे का कोई सबूत नहीं मिला, और ज्यादातर ट्रायल में खांसी बिना दवा के ही बेहतर हुई। NHS यह भी कहता है कि खांसी के लिए आमतौर पर एंटीबायोटिक नहीं दी जाती।
अगर खांसी लंबे दौरों में आती है, उल्टी पर खत्म होती है या उसमें हूप जैसी आवाज़ आती है, तो काली खांसी (whooping cough) के बारे में सोचना चाहिए। NHS बताता है कि कुछ वयस्कों में हूप की आवाज़ नहीं आती, और खांसी कई हफ्तों या महीनों तक चल सकती है।
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खांसी को 3 हफ्ते से ज्यादा और क्या चलाए रख सकता है?
कई आम स्थितियां खांसी को बनाए रखती हैं, और अक्सर उन्हें इन्फेक्शन का बचा हुआ असर समझ लिया जाता है। MedlinePlus आम कारणों में नाक या साइनस से जुड़ी एलर्जी, अस्थमा और COPD, साइनस की दिक्कतें जिनमें बलगम गले के पीछे टपकता है (postnasal drip), और एसिड रिफ्लक्स (GERD) गिनाता है। NHS धूम्रपान और सीने की जलन भी गिनाता है।
दो कारण आसानी से छूट जाते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट फेल्योर या किडनी की बीमारी में दी जाने वाली ACE इनहिबिटर दवाएं, और कम मामलों में ARB दवाएं, ऐसी खांसी कर सकती हैं जो जाती नहीं; अगर आप इनमें से कोई दवा लेते हैं तो उसे खुद बंद करने के बजाय डॉक्टर को बताएं। धूम्रपान, या दूसरों का धुआं सांस में लेना भी खांसी को बनाए रखता है।
टीबी और, कभी-कभार, फेफड़ों का कैंसर वे कारण हैं जिनसे लोग सबसे ज्यादा डरते हैं। NHS कहता है कि खांसी शायद ही कभी फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर चीज़ का संकेत होती है, लेकिन MedlinePlus बिना कोशिश के वजन घटने, रात में पसीना आने और टीबी के मरीज़ के संपर्क में आने को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की वजह बताता है। कभी-कभी कोई खास कारण नहीं मिलता।
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क्या 2 हफ्ते से ज्यादा की खांसी की टीबी जांच होनी चाहिए?
हां। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत, 2 हफ्ते से ज्यादा की खांसी वाले व्यक्ति को, दूसरे लक्षण हों या न हों, संभावित (presumptive) पल्मोनरी टीबी का मरीज़ माना जाता है और उसकी टीबी की जांच की जाती है। पहली जांच बलगम की जांच है: स्मीयर, या जहां लैब में उपलब्ध हो वहां मॉलिक्यूलर टेस्ट (NAAT)।
आपको उन 3 हफ्तों का इंतज़ार करने की जरूरत नहीं जो ज्यादातर गाइड लगातार बनी रहने वाली खांसी के लिए मानते हैं। इतनी लंबी खांसी के कई कारण होते हैं और टीबी उनमें से सिर्फ एक है, लेकिन जांच जल्दी कराने का मतलब है कि अगर यह टीबी है तो इलाज जल्दी शुरू हो सकता है।
टीबी की जांचों पर हमारी गाइड बलगम स्मीयर, CBNAAT और स्किन व ब्लड टेस्ट समझाती है, और यह भी कि हर टेस्ट क्या बता सकता है और क्या नहीं।
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जो खांसी जा नहीं रही, उसके लिए घर पर क्या कर सकते हैं?
खांसी ठीक होने तक उसके साथ नरमी बरतें। खूब तरल पदार्थ पिएं, जो बलगम को पतला करते हैं और उसे खांसकर निकालना आसान बनाते हैं। भाप वाला शावर या साफ वेपोराइज़र सूखे गले को आराम दे सकता है। धूम्रपान न करें, और दूसरों के धुएं से दूर रहें। अगर आपको अस्थमा या फेफड़ों की कोई दूसरी लंबी बीमारी है, तो उसके लिए बताई गई दवाएं लेते रहें।
गुनगुने पेय में गरम नींबू और शहद लेना एक पारंपरिक विकल्प है। NHS कहता है कि इसका असर कफ सिरप जैसा हो सकता है, लेकिन यह भी कहता है कि गरम नींबू-शहद और हर्बल दवाओं के सबूत सीमित हैं। 1 साल से छोटे बच्चे को कभी शहद न दें। 3 साल से छोटे बच्चे का खांसी की गोलियों और कड़ी टॉफियों से दम घुट सकता है।
NHS के अनुसार डिकंजेस्टेंट और कोडीन वाली खांसी की दवाएं खांसी नहीं रोकेंगी। फार्मासिस्ट का कफ सिरप या टॉफी खांसी नहीं रोकेगी, पर हो सकता है आपको कम खांसी आए। एंटीबायोटिक सिर्फ तभी दी जाती है जब उसकी जरूरत हो, जैसे बैक्टीरियल इन्फेक्शन में या जब आपको जटिलताओं का खतरा हो।
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क्या बच्चे को कोडीन वाली खांसी की दवा दे सकते हैं?
नहीं। दवा नियामक MHRA कहता है कि 12 साल से छोटे बच्चों में खांसी और सर्दी-जुकाम के लिए कोडीन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, क्योंकि सांस पर गंभीर साइड इफेक्ट का खतरा है, और सांस की दिक्कत वाले 12 से 18 साल के किशोरों के लिए भी इसकी सलाह नहीं दी जाती। उसकी समीक्षा में यह भी मिला कि बच्चों की खांसी में कोडीन के काम करने के सबूत सीमित हैं।
MedlinePlus सलाह देता है कि 6 साल या उससे छोटे बच्चे को कोई भी ओवर-द-काउंटर खांसी की दवा देने से पहले बच्चे के डॉक्टर से बात करें, चाहे वह बच्चों के लिए लिखी गई हो, क्योंकि ये दवाएं शायद काम नहीं करतीं और इनके गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। NHS जोड़ता है कि कुछ खांसी की दवाएं 12 साल से छोटे बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए।
खांसी वाले बच्चे के लिए तरल पदार्थ, आराम और, 1 साल की उम्र से, शहद वाला गुनगुना (गरम नहीं) पेय आमतौर पर बुनियादी उपाय हैं। अगर बच्चा सांस लेने के लिए जूझ रहा हो तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं। अगर 3 महीने से छोटे बच्चे को खांसी हो तो आज ही डॉक्टर को दिखाएं, और अगर बच्चे की खांसी 2 हफ्ते से ज्यादा चली हो तो डॉक्टर से मिलें, ताकि डॉक्टर टीबी और दूसरे कारणों की जांच कर सकें।
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खांसी में डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
NHS सलाह देता है कि अगर खांसी 3 हफ्ते से ज्यादा चली हो, बिना वजह वजन घट रहा हो, या कीमोथेरेपी या डायबिटीज़ जैसी वजह से आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) कमजोर हो, तो डॉक्टर को दिखाएं। MedlinePlus सलाह देता है कि खांसी 10 से 14 दिन से ज्यादा चले तो डॉक्टर से संपर्क करें, और बुखार, गाढ़ा बदबूदार पीला-हरा बलगम, या पैरों में सूजन के साथ खांसी या लेटने पर बढ़ने वाली खांसी, जो हार्ट फेल्योर के संकेत हो सकते हैं, में भी संपर्क करें।
डॉक्टर आपके सीने की जांच करेंगे, और अगर खांसी में खून हो, बुखार हो या वजन घटना, निगलने में दिक्कत, आवाज़ बैठना या काफी ज्यादा सांस फूलना जैसे पूरे शरीर के दूसरे लक्षण हों, तो चेस्ट एक्स-रे करवा सकते हैं। 8 हफ्ते से ज्यादा चली खांसी क्रॉनिक होती है और उसकी आगे जांच जरूरी है, जैसे अस्थमा या COPD देखने के लिए सांस की जांच (स्पाइरोमेट्री)। जिन चेतावनी संकेतों में इंतज़ार नहीं किया जा सकता, वे नीचे दिए हैं।
कब क्या करें
इमरजेंसी — अभी कदम उठाएं
तुरंत इमरजेंसी में जाएं, अगर आप कुछ धारियों से ज्यादा खून की खांसी कर रहे हैं, सांस लेने के लिए जूझ रहे हैं, आपके होंठ या त्वचा नीली, स्लेटी या बहुत फीकी दिख रही है, आपको अचानक भ्रम (कन्फ्यूज़न) की स्थिति हो, खून की खांसी या सांस फूलने के साथ सीने में दर्द हो, अचानक सीने में निचोड़ने या दबाव जैसा दर्द हो जो बांह, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैले या पसीने या मितली के साथ आए, या चेहरे या गले में सूजन हो, साथ में पित्ती या निगलने में दिक्कत हो।
आज ही — तुरंत संपर्क करें
आज ही डॉक्टर को दिखाएं, अगर आपको सीने में ऐसा दर्द है जो आता-जाता है या सांस अंदर लेने या खांसने पर होता है (अगर दर्द गंभीर है या आपको सांस भी फूल रही है तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं), बलगम में खून की कुछ धारियां हैं, बुखार के साथ गाढ़ा बदबूदार पीला-हरा बलगम है, खांसी बहुत ज्यादा खराब है या तेजी से बिगड़ रही है, या वजन घट रहा है, रात में पसीना आ रहा है या टीबी के मरीज़ से संपर्क हुआ है। 3 महीने से छोटे बच्चे को खांसी हो तो भी आज ही।
सामान्य — डॉक्टर को दिखाएं
डॉक्टर से मिलें, अगर आपकी खांसी 2 हफ्ते से ज्यादा चली हो (टीबी के लिए बलगम की जांच मांगें), 3 हफ्ते में भी नहीं गई हो, या आप धूम्रपान करते हैं, ACE इनहिबिटर लेते हैं या आपको सीने में जलन है और आप कारण जानना चाहते हैं। 8 हफ्ते से ज्यादा चली खांसी की पूरी जांच जरूरी है।
इस स्टोरी में बताए गए मान
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स्रोत
- Cough — NHSnhs.uk
- Cough — MedlinePlus Medical Encyclopediamedlineplus.gov
- Five things to know about postinfectious cough in adults — CMAJ, 2024pmc.ncbi.nlm.nih.gov
- Diagnostic Algorithm for TB Disease in NTEP — NTEP Knowledge Basentep.in
- Codeine for cough and cold: restricted use in children — MHRA Drug Safety Updategov.uk
- Coughing up blood — NHSnhs.uk
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