संक्षेप में
प्रेग्नेंसी में डायबिटीज का राष्ट्रीय टेस्ट 75 g ग्लूकोज के 2 घंटे बाद ली गई ब्लड शुगर की एक रीडिंग है, चाहे आप खाली पेट हों या नहीं, और इसका कट-ऑफ 140 mg/dL है। यहां जानिए यह कब होता है, WHO के 3 रीडिंग वाले टेस्ट से इसकी तुलना कैसी है, और पॉजिटिव नतीजे के बाद क्या होता है।
इमरजेंसी अगर: इंसुलिन ले रही किसी प्रेग्नेंट महिला को दौरा पड़े या वह बेहोश हो जाए: तुरंत इमरजेंसी सेवाओं को कॉल करें। राष्ट्रीय गाइडलाइन दौरे और बेहोशी को लो ब्लड शुगर के संकेतों में गिनती है, और कहती है कि इसका इलाज तुरंत होना चाहिए।
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फास्टिंग ग्लूकोज़ (FBS), पोस्ट-प्रैंडियल ग्लूकोज़ (PPBS)
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हर प्रेग्नेंट महिला की जांच क्यों होती है
जेस्टेशनल डायबिटीज (gestational diabetes) वह हाई ब्लड शुगर है जो प्रेग्नेंसी के दौरान शुरू होती है, या पहली बार पकड़ में आती है। इससे आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए इसे पकड़ने का एकमात्र तरीका टेस्ट है। जेस्टेशनल डायबिटीज पर राष्ट्रीय गाइडलाइन, जिसे 2018 में अपडेट किया गया, हर प्रेग्नेंट महिला की जांच करने को कहती है, सिर्फ उनकी नहीं जिन्हें रिस्क में माना जाता है।
यह आप दोनों के लिए मायने रखता है। गाइडलाइन चेतावनी देती है कि जेस्टेशनल डायबिटीज वाली मांओं के बच्चों को जन्म के बाद लो ब्लड शुगर का रिस्क होता है और पहले घंटे के भीतर उनकी शुगर जांची जानी चाहिए, और यह भी कि मांओं और उनके बच्चों को आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का ज्यादा रिस्क होता है। जेस्टेशनल डायबिटीज पर हमारी गाइड खुद इस बीमारी के बारे में बताती है; यह गाइड टेस्ट के बारे में है।
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राष्ट्रीय वन-स्टेप टेस्ट कैसे होता है
राष्ट्रीय टेस्ट एक ही चरण में होता है। आप लगभग 300 ml पानी में घुला 75 g ग्लूकोज पीती हैं, जिसे 5 से 10 मिनट के भीतर खत्म करना होता है, और 2 घंटे बाद आपकी ब्लड शुगर जांची जाती है। खाली पेट आने की जरूरत नहीं है: गाइडलाइन कहती है कि टेस्ट किया जाता है चाहे आप खाली पेट आई हों या नहीं, आपने आखिरी बार कब खाया इससे फर्क नहीं पड़ता। इसके लिए प्लाज्मा-कैलिब्रेटेड ग्लूकोमीटर या लैब एनालाइजर चाहिए, ताकि नतीजा उसी दिन मिल जाए।
2 घंटे की वैल्यू 140 mg/dL या ज्यादा हो तो इसका मतलब जेस्टेशनल डायबिटीज है; 140 से कम सामान्य है। अगर ड्रिंक पीने के 30 मिनट के भीतर उल्टी हो जाए, तो टेस्ट अगले दिन दोबारा होना चाहिए; 30 मिनट के बाद उल्टी हो तो टेस्ट जारी रहता है। बिना खाली पेट रहे होने वाले इस 75 g टेस्ट को अक्सर DIPSI टेस्ट कहा जाता है, उस स्टडी ग्रुप के नाम पर जिसने इसे प्रस्तावित किया था।
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किस हफ्ते: पहली विजिट पर, फिर 24 से 28 हफ्ते पर
गाइडलाइन दो टेस्ट करने को कहती है। पहला आपकी पहली एंटीनेटल विजिट पर, प्रेग्नेंसी में जितनी जल्दी हो सके। अगर वह सामान्य हो, तो दूसरा 24 से 28 हफ्ते पर, जब कई महिलाओं में शुगर सहने की क्षमता बिगड़ती है, और पहले टेस्ट के कम से कम 4 हफ्ते बाद। गाइडलाइन बताती है कि जेस्टेशनल डायबिटीज वाली महिलाओं में से सिर्फ लगभग एक तिहाई पहली तिमाही में पकड़ में आती हैं, इसीलिए दूसरा टेस्ट मायने रखता है।
अगर 24 से 28 हफ्ते वाला टेस्ट छूट जाए, तो इसे 24 हफ्ते के बाद कभी भी किया जा सकता है। अगर आपकी पहली विजिट 28 हफ्ते के बाद हो, तो उसी विजिट पर सिर्फ एक टेस्ट होता है, और गाइडलाइन कहती है कि देर से आना इसे छोड़ने का कोई कारण नहीं है।
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WHO का तीन रीडिंग वाला टेस्ट
कई लैब और डॉक्टर एक अलग टेस्ट इस्तेमाल करते हैं, जिसे इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ डायबिटीज एंड प्रेग्नेंसी स्टडी ग्रुप्स (IADPSG) ने 2010 में तय किया और WHO ने 2013 में अपनाया। आप रात भर खाली पेट रहती हैं, खाली पेट एक सैंपल देती हैं, 75 g ग्लूकोज पीती हैं और 1 और 2 घंटे पर दो और सैंपल देती हैं। अगर कोई भी एक वैल्यू अपने कट-ऑफ तक पहुंच जाए, तो जेस्टेशनल डायबिटीज का डायग्नोसिस होता है: खाली पेट 92 mg/dL, 1 घंटे पर 180 या 2 घंटे पर 153। IADPSG यह टेस्ट 24 से 28 हफ्ते पर रखता है; WHO कहता है कि डायग्नोसिस प्रेग्नेंसी में कभी भी किया जा सकता है।
WHO ऊपरी सीमाएं भी तय करता है। खाली पेट 126 या ज्यादा, या 2 घंटे पर 200 या ज्यादा की वैल्यू को जेस्टेशनल डायबिटीज नहीं, बल्कि प्रेग्नेंसी में डायबिटीज माना जाता है, क्योंकि इसका इलाज ज्यादा गहनता से किया जाता है। WHO खुद अपनी सिफारिश को कमजोर और सबूतों को बहुत कम गुणवत्ता वाला बताता है, और उम्मीद करता है कि इन मानदंडों से ज्यादा महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज वाला माना जाएगा। राष्ट्रीय गाइडलाइन अपने 140 वाले टेस्ट को WHO द्वारा सुझाया गया सिंगल-स्टेप टेस्ट बताती है, पर इसमें WHO के जो कट-ऑफ दिए गए हैं, खाली पेट 126 और 2 घंटे पर 140, वे WHO के 2013 के मानदंडों वाले नहीं हैं, जो ऊपर बताए गए तीन हैं।
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फायदा और कमी: आसान, पर कुछ महिलाएं छूट जाती हैं
वन-स्टेप टेस्ट आसान है: खाली पेट रहने की जरूरत नहीं, एक विजिट, एक ब्लड सैंपल और उसी दिन नतीजा, इसीलिए गाइडलाइन ने इसे चुना। इसकी कीमत यह है कि इससे कुछ ऐसी महिलाएं छूट जाती हैं जिनका डायग्नोसिस खाली पेट वाला 3 रीडिंग का टेस्ट कर देता। 1,031 प्रेग्नेंट महिलाओं की एक स्टडी में, जिनके दोनों टेस्ट कुछ दिनों के अंतर पर हुए, बिना खाली पेट वाले टेस्ट ने IADPSG मानदंडों से पकड़ी गई 106 महिलाओं में से सिर्फ 24 को पकड़ा, यानी 22.6% की सेंसिटिविटी, और लेखकों ने कहा कि डायग्नोसिस के लिए इसकी सलाह नहीं दी जा सकती।
कुछ दूसरी स्टडी में इसका प्रदर्शन बेहतर रहा। 936 महिलाओं की 2017 की एक स्टडी में IADPSG मानदंडों के मुकाबले सेंसिटिविटी 74.1% थी, यानी जेस्टेशनल डायबिटीज वाली लगभग एक चौथाई महिलाएं छूट गईं, और इसने जिन्हें चिह्नित किया उनमें से सिर्फ 63% की पुष्टि खाली पेट वाले टेस्ट से हुई। उस स्टडी में उद्धृत एक पुरानी स्टडी में पूरी सहमति बताई गई थी। सीधी बात यह है कि वन-स्टेप टेस्ट की सेंसिटिविटी 3 रीडिंग वाले टेस्ट से कम है, इसलिए सामान्य नतीजा उतनी तसल्ली नहीं देता जितना दिखता है। अगर आपके डॉक्टर खाली पेट वाला टेस्ट भी करवाने को कहें, तो इसकी वजह यही है।
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पॉजिटिव नतीजे के बाद
गाइडलाइन खाने और शारीरिक गतिविधि से शुरुआत करती है। पहले पॉजिटिव नतीजे के बाद आपको एक डाइट प्लान मिलता है, जिसे मेडिकल न्यूट्रिशन थेरेपी कहते हैं, और 2 हफ्ते तक रोज 30 मिनट पैदल चलने या एक्सरसाइज करने को कहा जाता है। फिर खाने के 2 घंटे बाद आपकी ब्लड शुगर जांची जाती है। अगर यह 120 mg/dL से कम हो, तो आप ऐसे ही जारी रखती हैं, दूसरी और तीसरी तिमाही में महीने में कम से कम एक टेस्ट के साथ। अगर यह 120 या ज्यादा हो, तो दवा शुरू की जाती है, मेटफॉर्मिन या इंसुलिन, जैसा आपके डॉक्टर तय करें। लक्ष्य हैं खाली पेट 95 से कम और खाने के दो घंटे बाद 120 से कम।
गाइडलाइन अतिरिक्त ग्रोथ स्कैन की भी बात करती है, और यह भी कि जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे की ब्लड शुगर जांची जाए। आपकी अपनी शुगर आमतौर पर डिलीवरी के बाद सामान्य हो जाती है, पर जन्म के 6 हफ्ते बाद आपको फिर से 75 g वाला टेस्ट करवाना चाहिए, खाली पेट और 2 घंटे पर: 2 घंटे पर 140 से कम सामान्य है, 140 से 199 इम्पेयर्ड ग्लूकोज टॉलरेंस (impaired glucose tolerance) है, और 200 या ज्यादा, या खाली पेट 126 या ज्यादा, डायबिटीज है। अगर यह सामान्य हो, तो गाइडलाइन हर साल डायबिटीज की जांच की सलाह देती है।
कब क्या करें
इमरजेंसी — अभी कदम उठाएं
इंसुलिन ले रही किसी प्रेग्नेंट महिला को दौरा पड़े या वह बेहोश हो जाए: तुरंत इमरजेंसी सेवाओं को कॉल करें। राष्ट्रीय गाइडलाइन दौरे और बेहोशी को लो ब्लड शुगर के संकेतों में गिनती है, और कहती है कि इसका इलाज तुरंत होना चाहिए।
आज ही — तुरंत संपर्क करें
इलाज चल रहा हो और दिन में एक से ज्यादा बार लो ब्लड शुगर (70 mg/dL से कम) हो, उल्टी हो रही हो और खाना न खा पा रही हों, या दवा के बावजूद रीडिंग लक्ष्य से बहुत ऊपर हों (खाली पेट 150 से ऊपर या खाने के बाद 200 से ऊपर): आज ही डॉक्टर को दिखाएं। गाइडलाइन कहती है कि इनमें तुरंत डॉक्टर की जरूरत है या बड़े अस्पताल में रेफर करना चाहिए।
सामान्य — डॉक्टर को दिखाएं
जेस्टेशनल डायबिटीज हुई थी: जन्म के 6 हफ्ते बाद 75 g वाला टेस्ट बुक करें, और अगर वह सामान्य हो तो उसके बाद हर साल डायबिटीज की जांच।
इस स्टोरी में बताए गए मान
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स्रोत
- National guideline: diagnosis and management of gestational diabetes mellitus, technical and operational guidelines (2018)nhm.gov.in
- Diagnostic criteria and classification of hyperglycaemia first detected in pregnancy (2013) — WHOncbi.nlm.nih.gov
- IADPSG recommendations on the diagnosis and classification of hyperglycemia in pregnancy (2010)pmc.ncbi.nlm.nih.gov
- Comparison of screening for gestational diabetes by OGTT in the non-fasting and fasting states (Mohan et al., 2014)pmc.ncbi.nlm.nih.gov
- Evaluation of the non-fasting 75 g glucose test (DIPSI criteria) for diagnosing gestational diabetes (2017)pmc.ncbi.nlm.nih.gov
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